
धूडां सूं चिणगार उठैला
ताप तावडै थार उठैला
खेतां खेडां सगळी ठौड़
लूवां लपटां डार उठैला
धोरां री धरती कद जानै
उच्छब इण दरबार उठैला
रातो तातो अगन पुहुप
रोहीडै सिणगार उठैला
जीवण बेलां हरियळ पाना
ऊन्यालै परबार उठैला
जबरो काम पोळायो भई !
जवाब देंहटाएंव्हाला भाई चैन सिंह शेखावत जी
जवाब देंहटाएंघणैमान रामराम !
सबसूं पैलां तो कैवणो चावूं कै आदरजोग सांवर जी दइया री पंचलड़ी री एक पोथी आ सदी मिजळी मरै 1996 में छपी थकी म्हारै खनै है ।
स्यात औ पैलो संस्करण कोनी ,क्यूं कै बां'रो देहावसान 1992 में हुयग्यो हो … ।
इण पर पंचलड़ी कवितावां नांव भी लिख्योड़ो है ।
अबै कागदजी ही बता सकै कै पांच पांच शे'रनुमा चरण वाळी ग़ज़लनुमा इण छांदस रचनावां री शरूवात कुण करी … :)
हालांकि आ बात घणी महताऊ भी कोनी लखावै , पण आप लिखिया हो जद प्रसंगवश कैवूं …
***************************************************
आपरी रचना भी आछी है … पण जद मात्रावां री गिणत रौ आप कह रया हो तो ,
खेतां खेडां सगळी ठौड़
अर
रातो तातो अगन पुहुप
अठै मात्रावां गड़बड़ीज रयी है , लागै ध्यान चूकग्यो … :)
उम्मीद करूं , नाराज़ नीं हुवोला …
नुंवै ब्लॉग खा्तर बधाई भी है …
हियतळ सूं बधाई !
मंगलकामनावां !!
♥होळी री आगूंच शुभकामनावां !!!♥
- राजेन्द्र स्वर्णकार